बातचीत –   ‘ अश्वमेध ‘ की लेखिका ‘ अपर्णां सिन्हा से ! 

​’अश्वमेध’ की लेखिका ‘अपर्णां’ से उनके  और उनके किताब के बारे में खास बातचीत |

प्रशन – मैं खुद भी आपके बारे में बता सकता था पर बेहतर होगा की आप ही रौशनी डाले | क्योंकी ‘खुद’ से बेहतर ‘खुद’ को कोई नहीं जानता | ‘अपर्णां’ कौन है आपकी नज़र में ? 



उतर – अपर्णां पार्वती जी का वो नाम है जो उन्हें तब मिला जब उन्होनेें शिव को पाने की तपस्या में एक पत्ता (पर्ण) भी नहीं खाया | अपर्णां पार्वती की तरह धृण निश्चई है, अपर्णां जिद्दी है, और वो हार नहीं मानती | अपर्णां हमेशा से एक लेखिका बनना चाहती थी और उसने ये सपना देखना कभी नहीं छोड़ा, उसने अपने सबसे कठिन समय को अपने इच्छा अनुरूप ढ़ाला | वो ना बीमारी से हारी  ना ही अपने परिस्थितियों से, कमजोरी में काँपते हाथों से भी उसने लिखना न छोड़ा और उसी का नतीजा हैं की अश्वमेध आज एक किताब के रुप में आपके सामने है |


प्रशन – जैसा की मुझे पता हैं लिखना बहुत ही धैर्य का काम होता है, बहुत समय भी लगता और ये आपकी दुसरी किताब हैं |  कौन कौन सी दिक्कते……कैसे आपने ये सफर तय किया……ऱौशनी डालिये उस सफ़र पर ?



उतर – अगर आपको लिखना पसंद है तो कोई भी समस्या दिक्कत नहीं देती, आप जब धृण निश्चई होते हैं तो रास्ता अपने आप बनने लगते हैं | पहली किताब होने के कारण बहुत सारे रिजेकशन झेलने पड़े, बहुत लोगों ने स्वयम्- प्रकाशन (शेल्फ – पब्लिकेशन) के लिए उकशाया पर मैं धृण निश्चई थी , खुद पर , कहानी पर पुरा विश्वास था | सृष्टि प्रकाशन ने मेरी किताब को हरी झंडी दिखा दी और किताब  मार्केट में आ गई |



प्रशन – क्या लेखनी का सफ़र औरतों के लिए बाकी के सफ़र से ज्यादा आसान है ?



उतर – लेखनी हर कला की तरह समय मांगता हैं , हर कला की तरह लेखनी भी भावनाओं को प्रस्तुत करता है , ये जीतना आसान है – क्योंकि आम धारना से एक औरत अपनी भावनाओं को ज्यादा अच्छे से प्रस्तुत कर सकती हैं , इक औरत के देखने का और समझने का नजरीया भी अलग    है , भावनायें महिलाओं में ज़्यादा होती हैं , पर आसान केवल भावनायें प्रकट करना है | आजकल की पब्लिकेशन इन्डस्ट्री केवल के लेखनी (कन्टेंट) पर नहीं टिकी हैं,  मार्केटिंग और प्रमोशन बहुत जरूरी हो गया    है , जिसका ऐसेस / सुविधा / वरकींग पुरूषो के पास थोड़ी ज्यादा है |यही कारण है की पुरे विश्व में सबसे ज्यादा बिकने वाली किताब पुरूषो की है, आदमीयो का वर्चस्व ज्यादा है |



प्रशन – हल्की रौशनी डालिये अपनी इस किताब “अश्वमेध” पर? 



उतर – अश्वमेध एक पॉलिटीकल थ्रीलर हैं | ये किताब अश्विन जामवाल के सफ़र के बारे में है जो उसने एक IAS से PM बनने तक किया और फिर विश्व का सबसे शक्तिशाली नेता बन गया | ये सफर उसने 25 सालो में तय किया और उसे भनक भी नहीं था की उसे एक शक्तिशाली इंसान बनाने में किसी और का हाथ है | कोई हैं जिसने उसे सारी जिंदगी कठपुतली की तरह नचाया | एक खेल रचा जिसमे अश्विन जामवाल को खत्म कर के वो इंसान खुद विश्व का सबसे शक्तिशाली इंसान बनना चाहता था |


प्रशन – ऐसा क्या है इस किताब में की लोगों को इस किताब को पढ़ना चाहिए ? 


उतर –  ये किताब एक पॉलिटीकल थ्रिलर है जो कि भारतीय और विश्व की राजनीति पर रौशनी डालती है | आज हर कोई रोमांटिक फिक्सन लिख रहा है,  ये पढ़ने वाले बने बनाये रास्ते से नया पन की तरफ खिचेगी | थ्रिलर होने के कारण रोमांच हर पन्ने में महसूस होगी और रफ़्तार भी है कहानी में जो पढ़ने वालो को बान्धे रखेगी | इसमे रोमांस है और रोमांच भी | इसमे राजनीति की वास्तविकता हैं और उसके पीछे छीपे इमोशन भी | यह एक सही इटरटेनर साबित होगी |



प्रशन – अच्छा अन्त में पाठको से कुछ कहना चाहेगी? 



उतर – मैं हर पाठक को और हर युवा को पढ़ने के लिए और खुद को एक्सप्रेस करने के लिए  कहूंगी | कभी हार न माने,  कभी सपना देखना न छोड़े , लिखे और व्यक्त करें |

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